रिश्तों की आहुति देने से पहले अपने अंदर की सारी गलती हुई आग में अपने देखे हुए सारे ख्वाब ,सारी भावनाएं , सारी संवेदनाएं और मन के कोने कोने में बसे उन सारे विचारो को ढूंढ ढूंढ के एक साथ रख के फूंक दीजिए और उसकी राख को हवा के साथ यूं घुल मिल के उड़ा दे की चाह करके भी उसका एक भी कतरा आपके पास ना रह जाए वरना उस राख में बचे हुए चिंगारे भी आपको और आपकी आत्मा को कभी शांति नहीं लेने देंगे गंगा प्रवाह के बाद भी आपकी अंतरात्मा को वो विचलित ही रखेगी ..............